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शब ए बारात गलतियों से तौबा करने, बख्शीश और रहमत की दुआ मांगने की रात।

शब ए बारात गलतियों से तौबा करने, बख्शीश और रहमत की दुआ मांगने की रात।

मिर्ज़ापुर-सहारनपुर शाबान महीने की 15वीं रात को शबे बरात कहते हैं। मुस्लिम समुदाय के लोग इबादात करते हुए शबे बरात को मनाते हैं यह इस्लाम में महत्वपूर्ण स्थान रखता है। मुसलमान शब-ए-बारात की रात इबादत तिलावत और सखावत करते हैं इसे मगफिरत की रात भी कहा जाता है क्योंकि इस रात लोग अल्लाह से अपने गुनाहों की माफी मांगते हैं।

आप हुजूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने इस रात की फजीलत बयान फरमाई है आपने फरमाया कि शाबान की 15वीं रात में तकदीरी फैसले होते हैं और इन्हें फरिश्ते के हवाले कर दिए जाते हैं। शबे बरात या माफी की रात इस्लामी रिवायत में सबसे मुकद्दस रातों में से एक है जिसे दुनिया भर के लाखों मुसलमान मानते हैं शबे बरात को वो रात माना जाता है जिसमें तमाम मुसलमान अपने गुनाह और गलतियों से तौबा करते हैं और बख्शीश और रहमत की दुआ करते हैं। शबे बरात का मतलब है तौबा के जरिए अपनी रूह की सफाई और बेहतर मुस्तकबिल के लिए खुदा से मदद तलब करना। इस रात के दौरान मुसलमान इबादत के अमल करते हुए दुआएं करते हैं कुरान की तिलावत करते हैं। शाबान का महीना कई वजह की बिना पर बड़ी अहमियत रखता है बुनियादी तौर पर यह एक ऐसा महीना होने की वजह से जिसमें आलिमी सतह पर मुसलमान रूहानी तौर पर रमजान के आने वाले मुकद्दस महीने के लिए खुद को तैयार करते हैं।

एक हदीस में यह है कि अल्लाह इस रात में आसमानी दुनिया की तरफ अपनी रहमतों की तवज्जो फरमाते हैं और ऐलान होता रहता है कि कोई भी आदमी अपने गुनाह बखसवाना चाहता है तो उसके गुनाह माफ कर दूंगा कोई आदमी रोजी तलाश करना चाहता है तो उसे रोजी दूंगा कोई आदमी किसी किसी मुसीबत में गिरफ्तार हो तो उसकी मुसीबत दूर कर दूंगा। इस रात में हमें चाहिए कि अपने लिए अपने मुल्क के लिए और सारे संसार की शांति के लिए दुआ करें।

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