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“48 साल की उम्र में पास की मौलवी परीक्षा, मोहसिना बनीं महिलाओं के लिए प्रेरणा”

“48 साल की उम्र में पास की मौलवी परीक्षा, मोहसिना बनीं महिलाओं के लिए प्रेरणा”‌

बेहट, सहारनपुर।

“जज़्बा हो तो उम्र मायने नहीं रखती” इस कहावत को सच साबित कर दिखाया है कस्बा बेहट के मोहल्ला सड़कपार निवासी 48 वर्षीय श्रीमती मोहसिना पत्नी मुशब्बर हसन ने। उत्तर प्रदेश मदरसा शिक्षा बोर्ड, लखनऊ द्वारा घोषित परीक्षा परिणाम में उन्होंने दसवीं (मौलवी) परीक्षा सेकेंड डिवीजन से उत्तीर्ण कर समाज के सामने एक प्रेरणादायक उदाहरण पेश किया है।

पारिवारिक जिम्मेदारियों और कठिन परिस्थितियों के बावजूद श्रीमती मोहसिना ने अपनी पढ़ाई जारी रखी और मेहनत, लगन तथा आत्मविश्वास के बल पर सफलता हासिल की। उनकी इस उपलब्धि ने यह साबित कर दिया कि शिक्षा प्राप्त करने की कोई निर्धारित उम्र नहीं होती और यदि इंसान में कुछ सीखने का जुनून हो तो हर मुश्किल आसान हो जाती है।

श्रीमती मोहसिना की सफलता से क्षेत्र में खुशी का माहौल है। परिवार, रिश्तेदारों और स्थानीय लोगों ने उन्हें बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की है। लोगों का कहना है कि उनकी यह उपलब्धि उन महिलाओं के लिए एक मजबूत संदेश है जो किसी कारणवश अपनी पढ़ाई अधूरी छोड़ देती हैं।

समाज के प्रबुद्ध लोगों ने कहा कि श्रीमती मोहसिना की मेहनत और संघर्ष आने वाली पीढ़ियों को शिक्षा के प्रति जागरूक करने का कार्य करेगा। उनकी सफलता यह संदेश देती है कि हौसला, मेहनत और दृढ़ इच्छाशक्ति के सामने उम्र कभी बाधा नहीं बनती।

“मेहनत और हौसले से हर मंजिल आसान हो जाती है, उम्र सिर्फ एक संख्या है।”

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