सहारनपुर।
मुकदमा संख्या 83/2022, धारा 2/3 गैंगस्टर अधिनियम तथा उत्तर प्रदेश गिरोहबंद एवं समाज विरोधी क्रियाकलाप (निवारण) अधिनियम, 1986 की धारा 14(1) के अंतर्गत न्यायालय ज़िलाधिकारी, सहारनपुर द्वारा संबंधित व्यक्ति एवं उनके परिवार की संपत्तियों को कुर्क करने का आदेश पारित किए जाने का मामला चर्चा में है। साथ ही तहसीलदार, बेहट को प्रशासक नियुक्त किए जाने की कार्रवाई भी सामने आई है।
उक्त प्रकरण में अफजाल, नसीम और राव लईक को माननीय इलाहाबाद उच्च न्यायालय से बड़ी राहत मिली है। दिनांक 04.09.2025 को पारित अपने निर्णय में उच्च न्यायालय ने इन तीनों के विरुद्ध चल रही गैंगस्टर अधिनियम की संपूर्ण कार्यवाही को निरस्त कर दिया।
वहीं मोहम्मद वाजिद, मोहम्मद जावेद एवं अलीशान की याचिकाएं खारिज कर दी गई थीं। इसके बाद जावेद, अलीशान एवं वाजिद द्वारा माननीय सर्वोच्च न्यायालय में विशेष अनुमति याचिका (SLP (Crl) 14377-14378/2025) दाखिल की गई।
दिनांक 18.09.2025 को माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने सरकार को नोटिस जारी करते हुए गैंगस्टर प्रकरण में निचली अदालत में चल रही समस्त कार्यवाही पर स्थगन (स्टे) आदेश पारित किया। वर्तमान में यह मामला सर्वोच्च न्यायालय में विचाराधीन है।
प्रभावित पक्ष का कहना है कि स्पष्ट न्यायिक आदेशों के बावजूद संपत्ति कुर्की जैसी कार्यवाही न्यायिक प्रक्रिया में हस्तक्षेप के समान है। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि कुर्की तथा उससे संबंधित सभी कार्यवाहियों को तत्काल प्रभाव से समाप्त किया जाए।
साथ ही यह भी कहा गया है कि इस पूरे प्रकरण को माननीय सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष उनके अधिवक्ता के माध्यम से उठाया जाएगा तथा आगे की विधिक कार्रवाई की जाएगी।

