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तीन राज्यों को जोड़ने वाला किसानों का अहम मार्ग बदहाल—ईंटों के खड़ंजे में तब्दील रास्ते से किसानों की बढ़ीती हैं मुश्किलें।

 

तीन राज्यों को जोड़ने वाला किसानों का अहम मार्ग बदहाल—ईंटों के खड़ंजे में तब्दील रास्ते से किसानों की बढ़ीता हैं मुश्किलें।

 

 

जनपद सहारनपुर की बेहट विधानसभा क्षेत्र के विकासखंड सढ़ोली कदीम अंतर्गत ग्राम पंचायत पाड़ली ग्रंट से निकलकर तीन राज्यों—उत्तर प्रदेश, हरियाणा और उत्तराखंड—को जोड़ने वाला महत्वपूर्ण ग्रामीण मार्ग बदहाली की कगार पर पहुंच चुका है। यह रास्ता सीधे नजदीकी हथिनीकुंड बैराज सीमा बॉर्डर तक जाता है, आपको बताते चले कि इस जर्जर हालत मार्ग की लंबाई लगभग दो से ढाई किलोमीटर है। लेकिन विडंबना यह है कि यह पूरा मार्ग लंबे समय से ईंटों के खड़ंजे में तब्दील होकर किसानों और स्थानीय लोगों के लिए बड़ी परेशानी का सबब बना हुआ है।

 

स्थानीय किसानों ने बताया कि यह रास्ता उनके लिए आर्थिक गतिविधियों की जीवनरेखा है, क्योंकि आसपास के गांवों से किसान अपनी मौसमी फसलें हरियाणा राज्य में ले जाकर बेचते हैं। हरियाणा की मंडियों की निकटता के कारण यह मार्ग उनके लिए सबसे सुविधाजनक था, लेकिन रास्ते की जर्जर हालत के कारण अब यहां से ट्रैक्टर, बुग्गी, पिकअप एवं छोटे वाहनों का गुजरना भी बेहद जोखिम भरा हो गया है।

 

बरसात के दिनों में खड़ंजे की ईंटें उखड़कर गड्ढों में बदल जाती हैं, जिससे वाहनों का निकलना लगभग असंभव हो जाता है। कई किसानों ने बताया कि खराब मार्ग के कारण फसल समय पर मंडी तक नहीं पहुंच पाती, जिससे उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है। वहीं स्थानीय निवासियों का कहना है कि इस क्षेत्र से प्रतिदिन सैकड़ों लोग हथिनीकुंड क्षेत्र की ओर आवागमन करते हैं, लेकिन मार्ग की दुर्दशा वर्षों से जस की तस बनी हुई है।

 

ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि तीन राज्यों को जोड़ने वाले इस महत्वपूर्ण मार्ग का जल्द से जल्द पक्का निर्माण कराया जाए ताकि किसानों को राहत मिल सके और क्षेत्र के विकास कार्य बाधित न हों। उनका कहना है कि यह सड़क न केवल कृषि आधारित गतिविधियों के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि भविष्य में यह पर्यटन और आपसी व्यापार के लिए भी बड़े अवसर पैदा कर सकती है।

 

स्थानीय लोगों का यह भी कहना है कि यदि शासन-प्रशासन इस सड़क की ओर ध्यान दे और इसे पक्का मार्ग के रूप में विकसित करे, तो यह रास्ता पूरे क्षेत्र की आर्थिक तस्वीर बदल सकता है। फिलहाल ग्रामीण और किसान दोनों ही इस उम्मीद में हैं कि उनकी आवाज़ जल्द ही संबंधित विभागों तक पहुंचे और इस बदहाल रास्ते का शीघ्र समाधान हो।

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